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COVID-19

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आफत corona... आफत सभी की जान पर है, जीवन की नदी उफान पर है हार चुके हिम्मत और हौसले, सबकी निगाहें आसमान पर है मंदिर-मस्जिद से टूट चुकी है, अब टिकी उम्मीदें इंसान पर हैं पता नहीं कहां जा के रुकेगी, अब ये जिंदगी ढलान पर है मरके भी न मिटने दूंगा आबरू, जबकि आंच मेरे ईमान पर है ये नींव तो किसी ने नहीं देखी, और सारा दोष मकान पर है आओ हम एक हो जाएं 'प्रेमी' एक बड़ा खतरा हिंदुस्तान पर है                    -prince thakur

Life based hindi kavita.

हकीक़त ज़िन्दगी की... आज सपने में अपनी मौत को करीब से देखा, कफ़न में लिपटे तन;जलते अपने शरीर को देखा।। खड़े थे लोग हाथ बांधे एक कतार में, कुछ थे परेशान कुछ उदास थे; पर वही कुछ छुपा रहे अपनी मुस्कान थे, दूर खड़ा देख रहा था में सारा मंज़र।। तभी किसी ने मेरा हाथ थाम लिया, और जब देखा उसका चेहरा तो मै बड़ा हैरान था; हाथ थामने वाला कोई और नहीं मेरा भगवान था।। चेहरे पर मुस्कान और नंगे पांव था, जब देखा मैंने उसकी तरफ जिज्ञासा भरी नज़रों से; तो हंस कर बोला "तूने हर दिन दो घड़ी जपा मेरा नाम था, आज प्यारे उसका कर्ज़ चुकाने आया हूं।। रो दिया अपने बेवकूफियों पर तब यह सोच कर;             जिसको दो घड़ी जपा             वो बचाने आए है,             और जिनमें हर घड़ी रमा रहा             वो शमशान पहुंचने आए हैं।। तभी खुली आंख मेरी बिस्तर पर विराजमान था, कितना था नादान मे...

Bachpan Hindi Kavita

              ।।बचपन।।  एक दफे की बात है,        जिसकी याद है धुंधली। चला करता था जब थाम कर,        पापा की उंगली।। उछलता था बाग में,      हाथो से छूने को तितली । मचलता था शर्तों पर,     खाने को कुल्फी पिघली।। रात में भागता छत पर,         गुल होते ही बिजली। झगड़ता था जब छोटी से,      पाने को आम की गुठली।। था कागज का हवाई जहाज,     मगर दिल में उड़ान थी असली। दौड़ता अम्मा के आंचल को,      कर देता जब कोई दादा से चुगली।। अब है मुखौटा हर चेहरे पर,       और हो गए हम भी नकली। जी रहे हम सब बेबस,      बनकर वक्त की कठपुतली  प्रिंस ठाकुर...