Bachpan Hindi Kavita
।।बचपन।।
एक दफे की बात है,
जिसकी याद है धुंधली।
चला करता था जब थाम कर,
पापा की उंगली।।
उछलता था बाग में,
हाथो से छूने को तितली ।
मचलता था शर्तों पर,
खाने को कुल्फी पिघली।।
रात में भागता छत पर,
गुल होते ही बिजली।
झगड़ता था जब छोटी से,
पाने को आम की गुठली।।
था कागज का हवाई जहाज,
मगर दिल में उड़ान थी असली।
दौड़ता अम्मा के आंचल को,
कर देता जब कोई दादा से चुगली।।
अब है मुखौटा हर चेहरे पर,
और हो गए हम भी नकली।
जी रहे हम सब बेबस,
बनकर वक्त की कठपुतली
प्रिंस ठाकुर...
Nice yaar
ReplyDeletewow😇😇
ReplyDeleteI really like it
ReplyDeleteNice bro ! You reminded me of childhood ....
ReplyDelete